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दवाईयों पर जीएसटी: अभी खरीद लें, 1 जुलाई से देना होगा इतना टैक्स

नई दिल्ली। जीएसटी गुड्स एवं सर्विस टैक्स 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है। ऐसे में लोगों के जहन में एक ही सवाल है कि आखिर जीएसटी के बाद उनके लाइफस्टाइल पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है। एक तरफ लग्जरी वस्तुएं महंगी होगी, होटलों में खाना खाना महंगा होगा वहीं दूध, दही, लस्सी, सब्जियां, आटा, बेसन, मैदा, नमक आदि को जीएसटी से बाहर रखा गया है। ऐसे में जीएसटी के बाद रोजमर्रा लाइफ पर पड़ने वाले असर को लेकर अलग अलग चर्चाएं हो रही है। यह भी चर्चा है कि मेडिकल सेक्टर यानी दवाइयों पर भी जीएसटी (GST on Medicines) का असर होगा।

GST on Medicines

 

इससे पहले ही जीएसटी का असर दवाओं पर हो, उससे पहले एनपीपीए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण दवाओं के दाम घटा दिए है ताकि दवाओं पर जीएसटी का कोई असर ना पड़े। एनपीपीए ने औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 की प्रथम अनुसूची में शामिल 761 दवाओं की अधिकतम मूल्य की सीमा कर दी है। यहीं नहीं इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। संशोधित लिस्ट के मुताबिक अधिकतर दवाओं के दाम कम कर दिए गए है। इनमें गंभीर रोगों की दवाईयों के साथ पैरासिटामॉल जैसी दवाइयां भी शामिल है।

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जानकारी के अनुसार, जीएसटी के बाद दवाओं को 12 फिसदी टैक्स दायरे में रखा गया है। दवाओं के दाम घटाने के पीछे मकसद है कि ताकि जीएसटी आने के बाद दाम ज्यादा नहीं बढ़े। बताया जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद इन दवाओं की कीमत में अधिक वृद्धि न होकर मामूली बढ़ोतरी होगी। भारतीय औषधि विनिर्माता संघ के अध्यक्ष दीपनाथ राय चौधरी के अनुसार, अनुसूचित दवाओं के मूल्य में कटौती की गई है। इसमें वैट उत्पाद शुल्क तथा मूल्य वद्रधित कर को भी हटा दिया गया है।

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साथ ही जिन अनुसूचित दवाओं पर कंपनियों को उत्पाद शुल्क नहीं देना पड़ता, उनके दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आपको बतादें विश्लेषक पहले से ही कहते रहे है कि जीएसटी के बाद दवाओं पर ज्यादा असर नहीं होगा। अब देखना यह है कि जीएसटी के बाद दवाओं और देश की जनता पर क्या असर होता है।

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